आदर्श समाज समिति इंडिया ने हिंदी दिवस पर किया विचार गोष्ठी का आयोजन

आदर्श समाज समिति इंडिया ने हिंदी दिवस पर किया विचार गोष्ठी का आयोजन

चिड़ावा। राष्ट्रीय साहित्यिक, सांस्कृतिक व सामाजिक संस्थान आदर्श समाज समिति इंडिया के तत्वावधान में सूरजगढ़ बाईपास चिड़ावा में जगदेव सिंह खरड़िया की अध्यक्षता में हिंदी दिवस विचार गोष्ठी का आयोजन किया।

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कार्यक्रम में युवा समाजसेवी वर्षा सोमरा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रही। कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट प्रदीप मान ने किया। हिंदी हमारी मातृभाषा है और हमारे देश की एकता का प्रतीक है।

यह एक ऐसी भाषा है जिसने देशभक्ति, साहित्य और संस्कृति की अमूल्य विरासत को जीवित रखा है। आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गांधी ने हिंदी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा- हिंदी दिवस का महत्व भारत में भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रति गहरी भावना और समर्पण का प्रतीक है। हिंदी दिवस हर वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है, क्योंकि संविधान सभा ने इसी दिन 1949 में हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था।

भारत की स्वतंत्रता के बाद 14 सितंबर, 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी की खड़ी बोली ही भारत की राजभाषा होगी। इसी महत्त्वपूर्ण निर्णय के महत्त्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा के अनुरोध पर सन् 1953 से संपूर्ण भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष ‘हिन्दी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में 13 सितम्बर, 1949 के दिन बहस में भाग लेते हुए तीन प्रमुख बातें कही थीं- किसी विदेशी भाषा से कोई राष्ट्र महान् नहीं हो सकता।
कोई भी विदेशी भाषा आम लोगों की भाषा नहीं हो सकती।

भारत के हित में, भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के हित में, ऐसा राष्ट्र बनाने के हित में जो अपनी आत्मा को पहचाने, जिसे आत्मविश्वास हो, जो संसार के साथ सहयोग कर सके, हमें हिन्दी को अपनाना चाहिए। संविधान सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू की बहस 12 सितम्बर, 1949 को चार बजे दोपहर में शुरू हुई और 14 सितंबर, 1949 के दिन समाप्त हुई। 14 सितम्बर की शाम बहस के समापन के बाद भाषा संबंधी संविधान का तत्कालीन भाग ’14 क’ और वर्तमान भाग 17, संविधान का भाग बन गया। संविधान सभा की भाषा विषयक बहस लगभग 278 पृष्ठों में मुद्रित हुई। इसमें डॉ. कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी और श्री गोपाल स्वामी आयंगार की महती भूमिका रही थी। बहस के बाद यह सहमति बनी कि संघ की भाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी। हिंदी हमारे देश के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह न केवल हमारी राजभाषा है, बल्कि यह हमारी अपनी संस्कृति का माध्यम भी है। हिंदी के माध्यम से न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के करोड़ों लोग अपनी भावनाओं और विचारों को बेहतर तरीके से व्यक्त कर सकते हैं। कार्यक्रम में देशराज सोमरा, जगदेव सिंह खरड़िया, वर्षा सोमरा, एडवोकेट प्रदीप मान, धर्मपाल गाँधी, डिप्टी बेनीवाल, विजेन्द्र राव, आशु स्वामी आदि अन्य लोग मौजूद रहे।

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