स्वतंत्रता सेनानी के. केलप्पन को भी जयंती पर किया याद

क्रांतिकारी बीना दास और अमर शहीद राजगुरु की जयंती मनाई

स्वतंत्रता सेनानी के. केलप्पन को भी जयंती पर किया याद

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सूरजगढ़। आदर्श समाज समिति इंडिया के कार्यालय सूरजगढ़ में समाजसेवी इंद्र सिंह शिल्ला के नेतृत्व में देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ने वाले सरदार भगत सिंह के साथी महान क्रांतिकारी अमर शहीद शिवराम हरि राजगुरु और क्रांतिकारी महिला बीना दास की जयंती मनाई। इस मौके पर प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और प्रथम लोकसभा के सदस्य राष्ट्रवादी नेता के. केलप्पन को भी उनकी जयंती पर नमन किया।

समाज सुधार और छुआछूत निवारण के क्षेत्र में के. केलप्पन अग्रणी व्यक्ति थे। वे महात्मा गांधी से बहुत प्रभावित थे। वीर तेजाजी विकास संस्थान के अध्यक्ष जगदेव सिंह खरड़िया ने क्रांतिकारी राजगुरु के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा- भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु तीन ऐसे नाम हैं, जिन्हें भारत का बच्चा-बच्चा जानता है। इन तीनों की दोस्ती इतनी महान थी कि इन्होंने एक लक्ष्य की प्राप्ति के लिये एक साथ वीरगति प्राप्त की।

भारत की आजादी के लिये अनेकों देशभक्तों ने अपनी-अपनी समझ से अलग-अलग रास्तों को अपनाया था। इन रास्तों पर चलकर अनेकों देशभक्तों ने शहादत भी प्राप्त की। ऐसे ही देशभक्तों में से एक थे, शिवराम हरि राजगुरु। क्रांतिकारी राजगुरु और सुखदेव दोनों ही भगत सिंह के बहुत अच्छे मित्र थे। लेकिन इन तीनों में जितनी ख्याति एक देश भक्त के रुप में शहीद भगत सिंह को मिली, उतनी प्रसिद्धि से सुखदेव और राजगुरु वंचित रह गये। आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गांधी ने क्रांतिकारी बीना दास के बारे में बताया कि बीना दास भारत की महिला क्रांतिकारियों में से एक थी। उन्होंने एक दीक्षांत समारोह में अंग्रेज गवर्नर स्टनली जैक्सन पर गोली चलाई, जिसकी वजह से उन्हें नौ साल की जेल हुई। महात्मा गांधी के सहयोग से 1937 में उनकी रिहाई हो पाई। जेल से बाहर आने के बाद वह राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ गई। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भी भाग लिया, जिसकी वजह से उन्हें 3 साल के लिए नजरबंद कर दिया गया। 1946 से 1951 तक वे बंगाल विधानसभा की सदस्य रही। गांधी जी की नोआखली यात्रा के समय लोगों के पुनर्वास के काम में भी बीना दास ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। आजाद भारत में क्रांतिकारी महिला बीना दास ने कष्ट भरा जीवन जिया और अंत में गुमनामी की मौत नसीब हुई। महान क्रांतिकारी महिला को हम नमन करते हैं। इस मौके पर योगाचार्य डॉ. प्रीतम सिंह खुगांई, सूबेदार शिवदान भालोठिया, जगदेव सिंह खरड़िया, धर्मपाल गांधी, इंद्रसिंह शिल्ला भोबियां, योगा खिलाड़ी सुदेश खरड़िया, उम्मेद सिंह शिल्ला, सुनील गांधी, विशाल बेरला, अंजू गांधी आदि अन्य लोग मौजूद रहे।

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